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यही वो मुस्कुराहट है जिसे अब पर्दे पर एक नए सिरे से कोई नही देख पायेगा। latest news // irrfan khan deaths // Anmol Subichar


यही वो मुस्कुराहट है जिसे अब पर्दे पर एक नए सिरे से कोई नही देख पायेगा। जी हाँ इरफानखान वह नाम वह "चेहरा" जिसने सिनेमा जगत को एक से बढ़ कर एक अदाकारी दिखाई, कभी सत्यजीत सरकार बन "गुंडे" पर बंदूक तानी और कभी खुद "पानसिंह तोमर" बन बंदूक कंधों में रखे जंगल में राज किया और कुछ ऐसे ही बसाहट तमाम लोगों के दिलों में भी "हासिल" की।
"हिंदी मीडियम"(बॉलीवुड) से लेकर "इंग्लिश मीडियम"(हॉलीवुड) तक सबमे अपनी धाक जमाई और अपनी अदाकारी से लोगों को सिर्फ कायल ही बना दिया।
"तलवार" सी धारदार बोलने की कला जो किसी भी साधारण से सीन में भी "जज़्बा" डाल दे ये तो सिर्फ एक यही "मदारी" कर सकता था।
ये "साली ज़िन्दगी" "राइट या रॉंग" कुछ भी नहीं देखती बस एक "रोग" आता है और ये "नाकआउट" हो जाती है, आदमी अपनी "आन" "फुटपाथ" से भी उठकर बना सकता है लेकिन उसका "किस्सा" "करीब करीब सिंगल" ही रहता है।
"बिल्लू" का वो "चेहरा" जिससे एक आवाज हमेसा सुनाई देती रही "मुम्बई मेरी जान" वो "धुंध" में कहीं खो गया। अभी भी दिल के किसी कोने से ऐसा लग रहा है कि "करामाती कोट" से कोई जादूगर निकलेगा और किसी "संडे" को अपनी एक नई "पजल" बनाएगा। सारे "गुनाह" सारे "कसूर" एक "लंचबॉक्स" के डिब्बे में समेट फिर से अपनी कहानी शुरू करेगा।
"यूँ होता तो क्या होता".....
ज्यों तुम "कारवां" लुटा गए यूं भी जाता नही कोई "मकबूल" तेरा जाना ऐसा रहा जैसे अपना चला गया हो कोई




Source:facebook wall of  Utkarsh Singh Sengar 

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