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भगवान कौन है ? Who is God ? Anmol Subichar // hindi Subichar //

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भगवान के बारे में लोग कहते है :-
" भगवान नाम रूप से न्यारा है | " यह बात गलत है क्योंकि :-
भगवान है परमपिता परमात्मा शिव | यह कभी स्थूल जन्म-मरण में नहीं आते | यह अजन्मा-अभोक्ता है | यह सदैव कल्याणकारी है इसलिए इनका नाम शिव है | तो भगवान का नाम हुआ ना |
सभी धर्म ने उन्हें लिंग का आकार देकर देकर ही पूजा की है |
अमरनाथ में जाकर असंख्यक लोग बर्फ के शिव लिंग की पूजा करते है |
श्रीरामचन्द्र जी ने रामेश्वर में शिवलिंग का निर्माण करके भगवान शिव की पूजा की |
भक्तिमार्ग में भी शुरू-शुरू में हीरे का शिवलिंग बनाकर ही राजा विक्रमादित्य ने पूजा शुरू की |
नेपाल में पशुपतिनाथ मन्दिर में लिंग आकर की प्रतिमा की ही पूजा होती है |
जापान में ध्यान स्थिति में लाल पत्थर पर ही ध्यान लगाते है |
संग-ए-असवद मक्का में भी लिंग रूपी पत्थर स्थित है |
इस प्रकार यह सिद्ध होता है भगवान का रूप लिंग स्वरूप माना है |

इसके अलावा भक्तिशास्त्र में अर्जुन ने श्री कृष्ण को भगवान का विराट रूप दिखाने को कहा तो अर्जुन को हजारों सूर्यों का प्रकाश अनुभव हुआ तो अर्जुन ने कहा :- बस प्रभु यह आदित्य प्रकाश की रोशनी सहन नहीं कर सकता |
तो यह तो भगवान् ज्योतिर्बिंदु प्रकाश स्वरूप हुआ ना |

भक्ति मार्ग के बहुत से लोग कहते है गीता का भगवान श्रीकृष्ण है | श्री कृष्ण तो एक बच्चा था तो एक बच्चे ने कब गीता लिखी ? यदि कृष्ण भगवान है तो वो तो शरीरधारी है और गीता में तो स्पष्ट लिखा है
भगवानुवाच :- " मैं अजन्मा हूँ यानि कभी जन्म-मरण रहित हूँ | मैं तो सदैव निराकार हूँ | "
फिर श्री कृष्ण को दिखाते है वो बड़े चाव से मक्खन खाते है |
अब गीता में स्पष्ट है की भगवान अभोक्ता है |
भगवान के लिए कहते है वो सदैव ही अजन्मा है सदैव निराकारी | जब उनको किसी ने जन्म ही नहीं दिया तो भगवान के तो लौकिक माता पिता नहीं हुए और जब सदैव ही निराकारी है तो स्थूल शरीर हुआ ही नहीं और स्थूल शरीर नहीं है तो स्थूल स्त्री से विवाह कैसे हो सकता है और स्थूल विवाह ही नहीं हुआ तो स्थूल सन्तान कैसे हो सकती है | इसलिए कहा जायेगा की सदैव निराकारी अजन्मा-अभोक्ता शिव परमात्मा ही भगवान है वह सदैव निराकार सुप्रीम आत्मा है इसलिए हम सभी आत्माओं का पिता है | बाकी
श्री कृष्ण तो स्थूल शरीर धारी है स्थूल जन्म लिया है उनके तो स्थूल माता पिता भी है और उनका स्थूल स्त्री से विवाह भी हुआ था और उनकी स्थूल सन्तान भी थी |
तो स्थूलधारी श्रीकृष्ण भगवान कैसे हो सकते है ?
( भगवान के तो माता पिता होते ही नहीं है वो तो स्वयं ही सबका पिता है और भगवान के लिए तो सभी कहते है ना " तू मात-पिता हम बालक तेरे " | )

भक्ति मार्ग के लोग कहते है की श्री कृष्ण ने द्वापर में आये |
और गीता में कहा गया है की :--- यदा-यदा ही धर्मस्य.................
यानि जब-जब धर्म की अति ग्लानि होगी तब मैं ( भगवान ) आता हूँ | पतितों को पावन बनाने |
तर्क :- वास्तव में धर्म की अति ग्लानि द्वापर में नहीं होती बल्कि कलयुग के भी अंत के भी अंत समय पर होती है | इसलिए इसी समय पर गीता के भगवान परमपिता परमात्मा शिव का दिव्य अवतरण एक अनुभवी वृद्ध तन में होता है |
जो आकर सहजराजयोग सिखलाते है और ईश्वरीय ज्ञान भी देते है |
वास्तव में द्वापर में सभी की दुर्गति नहीं होती है बल्कि अब वो समय है सभी की दुर्गति हो गई है सभी दुखी है परेशान है | यह दुनिया पूरी की पूरी पतित अब बन चुकी है | अब परमात्मा आये है सभी आत्माओं को सतगति देने | दुखो से छुड़ाने,पतित से पावन बनाने |
( वास्तव में पतित पावन उसको कहेंगे जो कभी पतित ना बने | अब जो जन्म लेगा उसकी कला तो समय दर समय गिरती ही है और वो पतित भी बनता जाता है | एक परमात्मा ही है जो जन्म-मरण से रहित है और वो ही है सदैव सम्पूर्ण पावन | तो पावन ही आकर पतित से पावन बना सकता है | जन्म-मरण से सदैव न्यारा होने से वो सदैव ही सतगति में रहता है और जो सदैव सतगति में रहता है वो ही दुर्गति में पड़े लोगो को सतगति दे सकता है | )
अब यदि द्वापर में श्री कृष्ण आये तो उनको सबकी सतगति कर देनी चाहिए तो फिर द्वापर के बाद कलयुग क्यों आया ? जो अत्यंत दुखों का युग है | द्वापर के बाद तो फिर सतयुग का आगमन होना चाहिए ना | किन्तु द्वापर के बाद कलयुग आ गया |
वास्तव में अब है कलयुग का विनाश का समय , परमपिता परमात्मा शिव बाबा (भगवान ) अब सबकी सतगति कर हम आत्माओं को आत्मा-परमात्मा की दुनियाँ परमधाम ले जाते है फिर हम आते है सतोप्रधान नई दुनियाँ सतयुग में |



Source:Facebook wall of Anil Tyagi

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